भकपा माले के बिहार चुनाव के लिए पिछले दिनों जारी किए गए “परिवर्तन संकल्प पत्र (चुनावी घोषणापत्र) में बिहार को नये, समानता और लोकतंत्र की सशक्त नींव पर खड़ा करने का वादा किया गया है ताकि विकास का लाभ वंचित समुदाय तक पहुंचे।
परिवर्तन संकल्प पत्र में कहा गया है कि बीते दो दशकों से राज्य सत्ता में बैठी भाजपा-जदयू सरकार से राज्य को मुक्त करने का समय आ गया है। विकास के नाम पर विनाश, सुशासन के नाम पर अपराध, लूट व अराजकता, चौपट हो चुकी शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था, गरीबी का दुष्चक्र, ऐतिहासिक पिछड़ापन व पलायन, दलितों व महिलाओं के खिलाफ हिंसा, चरम बेरोजगारी – आज के बिहार का यही सच है। छात्र-नौजवान रोजगार और भविष्य की तलाश में पलायन कर रहे हैं, किसान कर्ज और लागत के बोझ तले दबे हैं, और महिलाएं कर्जदारी व असुरक्षा के दोहरे संकट में जी रही हैं। अब यह साफ है कि यह सरकार बिहार को विनाश की ओर धकेल चुकी है।
माले यह चुनाव महागठबंधन के तहत 20 सीटों पर लड़ रही है। माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य के अनुसार पार्टी भले कम सीटों पर चुनाव लड़ रही हो लेकिन पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ भाकपा(माले) चुनाव लड़ रही है। उन्होंने कहा, “इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ते हुए हमारा दृढ़ संकल्प है कि बिहार के गरीबों, दलितों, वंचितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और युवाओं के हक-अधिकार के लिए पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे. हम जानते हैं कि हमारे संघर्ष का केंद्र न सिर्फ विधानसभा की सीटें हैं, बल्कि बिहार की जनता की आवाज, उम्मीद और उनके अधिकार हैं।”
उन्होंने कहा, “इंडिया गठबंधन के साझा संकल्प पत्र के साथ ही भाकपा(माले) का यह परिवर्तन संकल्प पत्र हम आपके हाथों में सौंप रहे हैं, जो तमाम संघर्षशील, मेहनतकश तबकों के बेहतर भविष्य के लिए, बिहार के परिवर्तन के संकल्प का दृष्टिपत्र है। यह संकल्प पत्र एक नये बिहार की परिकल्पना है – ऐसा बिहार जो समानता, शिक्षा, रोजगार, न्याय और मानवीय गरिमा पर टिका होए ऐसा बिहार जो अपनी युवा शक्ति के बल पर आगे बढ़े।”
भूमिहीनों व बेघरों को नये
घोषणापत्र में किए वादों में हर भूमिहीन और बेघर परिवार को ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डिसमिल, शहरी इलाकों में 3 डिसमिल जमीन और पक्का मकान देने, बंदीपाध्याय आयोग की सिफारिशें लागू कर 21 लाख एकड़ जमीन का वितरण, गैर-मजरूआ और सरकारी जमीनों पर बसे गरीबों को पर्चा और दखल-दिहानी की गारंटी देने, बिना पुनर्वास किसी गरीब को उजाड़ने पर रोक का वादा किया गया है।
किसान, बटाईदार और कृषि समृद्धि
किसानों, बटाईदारों को सभी फसलों की सरकारी खरीद और उचित दाम की गारंटी, किसानों और ग्रामीण मजदूरों के कर्ज माफ करने, खेती के लिए मुफ्त बिजली, हर खेत तक पानी और नहरों का आधुनिकीकरण, बटाईदारों को पहचान-पत्र, हक की गारंटी और बेदखली पर रोक, एपीएमसी एक्ट की बहाली, कृषि बाजार समितियों को पुनः सक्रिय करने और कृषि आधारित उद्योग-धंधों पर जोर देने का वादा किया गया है।
सामाजिक समानता और न्याय
वंचित समुदायों को कुल 65 प्रतिशत आरक्षण और इसे 9वीं अनुसूची में दर्ज कराने की पहल करने, बिजली, राशन और पेंशन जैसी बुनियादी जरूरतों की गारंटी देने, दलित-गरीबों पर हिंसा, पुलिसिया ज्यादती और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई करने, 1500 रु. वृद्धावस्था पेंशन, 2 लाख रुपए तक के सभी कर्जो की माफी के वादे किए गए हैं।
श्रमिकों और स्कीम वर्करों को सम्मान
सभी आशा, ममता, रसोइया, जीविका, सफाईकर्मी और नियोजन कर्मियों को न्यूनतम मानदेय व सरकारी दर्जा देने, मनरेगा में 200 दिन काम, 600 रु. दैनिक मजदूरी करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए निदेशालय व राज्यवार सहायता केंद्र बनाने का वादा किया गया है।
युवा और शिक्षा
सभी रिक्त पदों पर तत्काल बहाली, बेरोजगारों को 3000 रु. मासिक भत्ता देने, समान शिक्षा प्रणाली और निजी शिक्षा पर नियंत्रण, पेपर लीक पर सख्त कानून और छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि करने, हर प्रखंड में महिला कॉलेज और छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा देने और पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की पहल करने के वादे किए गए हैं।
महिलाओं के अधिकार और सम्मान
सभी महिलाओं को 2500 रु. मासिक सम्मान राशि देने, हिंसा, उत्पीड़न और ऑनर क्राइम पर सख्त रोक लगाने, कार्यस्थलों पर विशाखा गाइडलाइन का पालन और महिला हॉस्टल की व्यवस्था करने, माइक्रोफाइनेंस शोषण पर नियंत्रण और गरीब महिलाओं के कर्ज माफ करने, स्वरोजगार के लिए ब्याजमुक्त ऋण और मातृत्व अवकाश की गारंटी देने के वादे किए गए हैं।
अल्पसंख्यक, आदिवासी और पर्यावरण
अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर अमल के अलावा सांप्रदायिक हिंसा और हेट स्पीच पर त्वरित कार्रवाई करने, आदिवासियों को वनाधिकार, पेसा कानून के तहत स्वशासन और विस्थापन से सुरक्षा देने, बाढ़ नियंत्रण के लिए टिकाऊ समाधान और अवैध खनन पर रोक लगाने के वादे किए गए हैं।
स्वास्थ्य और जनसेवा
स्वास्थ्य सेवाओं में 40 प्रतिशत रिक्तियों की बहाली, सभी के लिए मुफ्त इलाज, जांच और दवा, हर पंचायत में डॉक्टर और दवा के साथ सुसज्जित स्वास्थ्य केंद्र और हर गांव में शुद्ध पेयजल और सफाई व्यवस्था के वादे किए गए हैं।
छोटे दुकानदार, स्टार्टअप और विकलांग जन
फुटपाथ दुकानदारों की आजीविका की सुरक्षा और वेंडिंग जोन की गारंटी, छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप्स को आसान कर्ज व मार्गदर्शन सहायता और सभी विकलांग जनों को घ्3000 मासिक पेंशन और मुफ्त राशन के वादे किए गए हैं।
इसके अलावा सुसंगत शासन और संविधान की सुरक्षा, शराबबंदी कानून की समीक्षा और न्यायपूर्ण नीति बनाने, संविधान विरोधी या संघीय ढांचे के खिलाफ किसी कानून को बिहार में लागू नहीं होने देने और महंगाई पर नियंत्रण के वादे किए गए हैं।